अरावली पर्वत श्रृंखला: भारत की सबसे प्राचीन पहाड़ियां, जो थार रेगिस्तान को रोकती हैं

अरावली पर्वत श्रृंखला: भारत की सबसे प्राचीन पहाड़ियां, जो थार रेगिस्तान को रोकती हैं

अरावली पर्वत श्रृंखला: भारत की सबसे प्राचीन पहाड़ियां, जो थार रेगिस्तान को रोकती हैं

अरावली पर्वत श्रृंखला का मनोरम दृश्य

अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे पुरानी पर्वत मालाओं में से एक है। यह दुनिया की सबसे प्राचीन फोल्ड माउंटेन सिस्टम मानी जाती है, जिसकी उम्र लगभग 2 अरब वर्ष से अधिक है। गुजरात से दिल्ली तक करीब 692 किलोमीटर तक फैली यह श्रृंखला राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के पर्यावरण संतुलन की कुंजी है।

अरावली पहाड़ियां और थार रेगिस्तान का अवरोध

अरावली का इतिहास और भूगोल

अरावली प्राचीन गोंडवाना लैंड का अवशेष है। समय के साथ अपरदन के कारण इसकी ऊंचाई कम हो गई, लेकिन यह उत्तर-पश्चिम भारत की प्राकृतिक किलेबंदी रही है। इतिहास में इसने आक्रमणकारियों के लिए अवरोध पैदा किया और राजपूत राज्यों की रक्षा की। यहां कुंभलगढ़ किला जैसे प्राचीन दुर्ग और मंदिर स्थित हैं।

अरावली में तेंदुआ और वन्यजीव

पर्यावरणीय महत्व

  • थार रेगिस्तान का अवरोध: अरावली थार मरुस्थल के पूर्व की ओर फैलाव को रोकती है। अगर यह न होती, तो दिल्ली-एनसीआर और इंडो-गंगा के मैदान रेगिस्तानी हो जाते।
  • भूजल पुनर्भरण: पहाड़ियों की चट्टानें पानी सोखती हैं, जो राजस्थान और हरियाणा के भूजल स्तर को बनाए रखती हैं।
  • जैव विविधता: यहां तेंदुआ, लेपर्ड, विभिन्न पक्षी और दुर्लभ पेड़-पौधे पाए जाते हैं। यह सरिस्का से दिल्ली तक वन्यजीव कॉरिडोर है।
अरावली में अवैध खनन का दृश्य

वर्तमान चुनौतियां और खतरे

आज अरावली संकट में है। अवैध खनन, अतिक्रमण और शहरीकरण से इसका बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया परिभाषा के अनुसार अब केवल 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही मुख्य अरावली माना जाएगा, जिससे 90% क्षेत्र संरक्षण से बाहर हो सकता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला खतरनाक है। पिछले कुछ दशकों में 35% अरावली क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे धूल भरी आंधियां, गिरता भूजल और बढ़ता तापमान जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

संरक्षण के प्रयास

सरकार और कोर्ट ने खनन पर प्रतिबंध लगाए हैं। 'ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ अरावली' जैसी योजनाएं चल रही हैं। हमें अरावली को बचाना होगा, वरना उत्तर भारत का पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा।

अरावली सिर्फ पहाड़ियां नहीं, बल्कि हमारी जलवायु और जल सुरक्षा की रक्षा करने वाली ढाल हैं। इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है!

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ